इफ़्तार के पहले निवाले के पीछे की परंपरा, और खजूर लंबे रोज़े के दिन का स्वाभाविक अंत क्यों है।
चौदह सदियों से अधिक की परंपरा
रिवायत है कि पैगंबर ﷺ ताज़ा खजूर से रोज़ा खोलते थे, ताज़ा न हों तो सूखे खजूर से, और वह भी न हों तो पानी से। मुसलमान तब से इस परंपरा का पालन करते हैं।
लंबे दिन के बाद प्राकृतिक ऊर्जा
खजूर में ग्लूकोज़ और फ्रक्टोज़ जैसी प्राकृतिक शर्कराएँ भरपूर होती हैं, इसलिए तुरंत ऊर्जा मिलती है; इनमें फाइबर और पोटैशियम जैसे खनिज भी होते हैं। कई लोग इन्हें भोजन की हल्की शुरुआत मानते हैं।
इफ़्तार को ख़ास बनाएँ
खजूर को अरबी कॉफ़ी या चाय के साथ परोसें, बादाम या ताहिनी भरें, या मेज़ पर कई किस्में रखें। प्रीमियम खजूर का बॉक्स उपहार देना भी रमज़ान का प्रिय भाव है।
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